अनुच्छेद लेखन 1. अभ्यास का महत्व अथवा करत करत अभ्यास ते जड़मति होत सुजान इस सूक्ति का आशय है -- बार-बार अभ्यास करने से मंदबुद्धि भी ज्ञानी बन जाता है। किसी भी कार्य में कुशलता पाने का गुरु-मंत्र है-अभ्यास। अभ्यास के बिना मात्र समझने, पढ़ने और सुनने से किसी कर्म में कुशल नहीं हुआ जा सकता। तैराकी सीखने के लिए या वाहन चलाने के लिए अभ्यास की अधिक जरूरत है, किसी कोच से सीखने की कम। एकलव्य का उदाहरण हमारे सामने है। अर्जुन और उसके भाइयों को धनुर्विद्या सिखाने के लिए गुरु द्रोणाचार्य ने जी-जान लगा दी। फिर भी एकलव्य उनसे अधिक कुशल धनुर्धर बना। कारण? उसने निरंतर अभ्यास किया। लगातार धनुष चलाने से वह सिद्ध धनुर्धारी बन गया। कबीर अनपढ़ थे। उन्होंने दोहा लिखने की विद्या कहीं से नहीं सीखी। प्रतिभा और अभ्यास से वे कुशल कवि बन गए। सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई के बारे में भी यही बात कही जा सकती है। निरंतर अभ्यास के कारण ही एक सब्जी बेचने वाला अनपढ़ व्यक्ति गणित के अध्यापक से भी जल्दी सब्जी के पैसे गिनकर बता सकता है। अभ्यास की महिमा अनंत है। यही कारण है कि अखाडे में पहलवान जीतते हैं, उनके क...
1: शब्द और पद प्रश्न 1: सार्थक वर्ण समूह को क्या कहा जाता है? उत्तर : शब्द प्रश्न 2: जब शब्दों को वाक्य में स्थान मिलता है, तो ये क्या कहलाते हैं? उत्तर : पद प्रश्न 3: नाम का बोध कराने वाले शब्द क्या कहलाते हैं? उत्तर : संज्ञा प्रश्न 4: संज्ञा के कितने भेद होते हैं? उनके नाम लिखिए। उत्तर : संज्ञा के तीन भेद होते हैं। उनके नाम हैं -- (i) जातिवाचक संज्ञा, (ii) व्यक्तिवाचक संज्ञा और (iii) भाववाचक संज्ञा। प्रश्न 5: गौतम बुद्ध, ऐरावत, काठमांडू, हिमालय, बागमति --- आदि किस संज्ञा के उदाहरण हैं? उत्तर : व्यक्तिवाचक संज्ञा प्रश्न 6: शहर, पहाड़, देश, नदी, किताब -- आदि किस संज्ञा के उदाहरण हैं? उत्तर : जातिवाचक संज्ञा प्रश्न 7: सच्चाई, बचपन, मोटापा, शीतलता, ईमानदारी -- किस संज्ञा के उदाहरण हैं? उत्तर : भाववाचक संज्ञा प्रश्न 8: जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं, वे कौन से पद होते हैं? उत्तर : सर्वनाम प्रश्न 9: सर्वनाम के कितने भेद होते हैं? उनके नाम लिखिए। उत्तर : सर्वनाम के 6 (छह) भेद होते हैं। उनके नाम हैं -- (i) पुरुषवाचक सर्वनाम (!!) निश्...
साना साना हाथ जोड़ि... ---मधु काँकरिया प्रश्न 1: झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था? उत्तर : गंतोक शहर की एक झलक ने ही लेखिका को सम्मोहित कर लिया था। रात्रि के समय जगमगाते प्रकाश के कारण शहर अत्यंत सुंदर नजर आ रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे आकाश के सारे तारे नीचे बिखर कर जमीन पर टिमटिमा रहे हैं। तराई में तारों के गुच्छों की झालर-सी लटकती दिखाई दे रही थी। प्रश्न 2: गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया? उत्तर : गंतोक को सुंदर बनाने में यहाँ के श्रमिक वर्ग के साथ-साथ यहाँ के परिश्रमी निवासी, पुरुष-महिला आदि सभीका काफी योगदान है। उन्हीं के श्रम के बल पर सिक्किम और गंतोक को अद्भुत सुंदरता मिली है। इसलिए लेखिका ने गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' कहा है। प्रश्न 3: कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओं का फहराना किन अलग-अलग अवसरों की ओर संकेत करता है? उत्तर : बौद्ध धर्म के लोगों द्वारा...
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