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अनुच्छेद/पत्र/संवाद लेखन

अनुच्छेद लेखन  1. अभ्यास का महत्व  अथवा करत करत अभ्यास ते जड़मति होत सुजान  इस सूक्ति का आशय है -- बार-बार अभ्यास करने से मंदबुद्धि भी ज्ञानी बन जाता है। किसी भी कार्य में कुशलता पाने का गुरु-मंत्र है-अभ्यास। अभ्यास के बिना मात्र समझने, पढ़ने और सुनने से किसी कर्म में कुशल नहीं हुआ जा सकता। तैराकी सीखने के लिए या वाहन चलाने के लिए अभ्यास की अधिक जरूरत है, किसी कोच से सीखने की कम। एकलव्य का उदाहरण हमारे सामने है। अर्जुन और उसके भाइयों को धनुर्विद्या सिखाने के लिए गुरु द्रोणाचार्य ने जी-जान लगा दी। फिर भी एकलव्य उनसे अधिक कुशल धनुर्धर बना। कारण? उसने निरंतर अभ्यास किया। लगातार धनुष चलाने से वह सिद्ध धनुर्धारी बन गया। कबीर अनपढ़ थे। उन्होंने दोहा लिखने की विद्या कहीं से नहीं सीखी। प्रतिभा और अभ्यास से वे कुशल कवि बन गए। सूरदास, तुलसीदास, मीराबाई के बारे में भी यही बात कही जा सकती है। निरंतर अभ्यास के कारण ही एक सब्जी बेचने वाला अनपढ़ व्यक्ति गणित के अध्यापक से भी जल्दी सब्जी के पैसे गिनकर बता सकता है। अभ्यास की महिमा अनंत है। यही कारण है कि अखाडे में पहलवान जीतते हैं, उनके क...

एक गिरगिट का सपना/ मोहन राकेश

एक गिरगिट का सपना            लेखक: मोहन राकेश  एक गिरगिट हरे जंगल में रहता था। उसके लिए वह बहुत अच्छी जगह थी। वहाँ उसे भरपूर खाना-पीना मिलता था। फिर भी वह उदास रहता था। क्योंकि, उसका अपना कोई रंग नहीं था। वह हर पल बदलता रहता—हरा, नीला, पीला, काला। लगता, उसकी कोई पहचान ही नहीं। वह हर जीव से ईर्ष्या करता। पास के साँप की खूबसूरत खाल देखकर सोचता—काश! मैं साँप होता! मैं साँप की तरह ही रेंगता, फन उठाता, मुझसे सब डरते। एक रात बदहजमी से उसे नींद नहीं आई। उसके एक दोस्त ने उसे नींद की पत्ती दी। खाई तो उसे गहरी नींद आई और अजीब सपना शुरू हुआ। सपने में वह साँप बन गया था। फन उठाया, रेंगा, बहुत खुश हुआ। लेकिन नेवला लपका। रंग नहीं बदल सका, डरकर छिपा। सोचा—काश नेवला होता! तो नेवला बन गया। उछला-कूदा, लेकिन काँटे में फँस गया। सोचा—काश पेड़ की टहनी होता! तो टहनी बन गया। हवा में झूलने लगा। फिर कौवे आए, चोंच मारी। सोचा—काश कौवा होता! तो कौवा बन गया। उड़ चला, आसमान में कई चक्कर लगाए। लेकिन नीचे लड़के गुलेल लिए निशाना साधने लगे। वह डर के मारे चिल्ला उठा। तभी अचानक उसकी आँ...

छिप-छिप अश्रु बहाने वालो/ कवि: गोपालदास "नीरज"

छिप-छिप अश्रु बहाने वालो           कवि: गोपालदास "नीरज" छिप-छिप अश्रु बहाने वालो, मोती व्यर्थ लुटाने वालो कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है। सपना क्या है, नयन सेज पर सोया हुआ आँख का पानी और टूटना है उसका ज्यों जागे कच्ची नींद जवानी गीली उमर बनाने वालो, डूबे बिना नहाने वालो कुछ पानी के बह जाने से, सावन नहीं मरा करता है। कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है। माला बिखर गयी तो क्या है खुद ही हल हो गयी समस्या आँसू गर नीलाम हुए तो समझो पूरी हुई तपस्या रूठे दिवस मनाने वालो, फटी कमीज़ सिलाने वालो कुछ दीपों के बुझ जाने से, आँगन नहीं मरा करता है। कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है। खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर केवल जिल्द बदलती पोथी जैसे रात उतार चाँदनी  पहने सुबह धूप की धोती वस्त्र बदलकर आने वालो! चाल बदलकर जाने वालो! चन्द खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है। कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है। लाखों बार गगरियाँ फूटीं, शिकन न आई पनघट पर, लाखों बार किश्तियाँ डूबीं, चहल-पहल वही है तट पर, तम की उमर बढ़ाने वालो! लौ की ...

प्रश्नोत्तर (पुनरावृत्ति)

 (1) शब्द और पद  प्रश्न 1: रेखांकित पदों के नाम लिखिए: (क) बच्चा गाय को पानी पिला रहा है। उत्तर : बच्चा: संज्ञा          गाय: संज्ञा           पानी: संज्ञा          पिला रहा है: क्रिया  (ख) वह रोज सुबह पैदल चलता है। उत्तर : वहः सर्वनाम           रोजः क्रियाविशेषण           सुबहः क्रियाविशेषण          पैदल चलता है: क्रिया (ग) पक्षी नीले आकाश में उड़ रहे हैं। उत्तर : पक्षी: संज्ञा          नीले: विशेषण           आकाशः संज्ञा           उड़ रहे हैं: क्रिया  प्रश्न 2: कर्म के हिसाब से क्रिया के कितने भेद होते हैं? उनके नाम लिखिए: उत्तर : कर्म के हिसाब से क्रिया के दो भेद होते हैं। वे हैं: (क) सकर्मक क्रिया और (ख) अकर्मक क्रिया प्रश्न 3: काल किसे कहते हैं? उसके कितने भेद होते हैं? उनके नाम लिखिए:  उत्तर : क्रिया ...
  Class: 5 (five) रिमझिम:  पाठ-10: एक दिन की बादशाहत  पाठ-11: चावल की रोटियाँ  पाठ-12: गुरु और चेला व्याकरण: -- अपठित गद्यांश  -- पर्यायवाची शब्द  -- विलोम शब्द  -- अनेक शब्दों के लिए एक शब्द -- अनेकार्थी शब्द  -- श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द -- मुहावरे  -- लोकोक्तियाँ -- अनुच्छेद-लेखन ============================ Class: 6(six) मल्हार: पाठ-7: जलाते चलो पाठ-8: सत्रिया और बिहू नृत्य पाठ-9: मैया मैं नहिं माखन खायो रामकथा: पाठ-7: सोने का हिरण पाठ-8: सीता की खोज पाठ-9: राम और सुग्रीव व्याकरण: -- अपठित गद्‌यांश -- अनुच्छेद लेखन -- पत्र-लेखन -- विलोम शब्द -- पर्यायवाची शब्द -- वाक्यांश के लिए एक शब्द -- श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द -- अनेकार्थी शब्द -- मुहावरे -- लोकोक्तियाँ -- संधि  ========================== Class: 7(Seven) वसंत: पाठ- 8: रहीम के दोहे पाठ- 9: एक तिनका पाठ-10: खानपान की बदलती तस्वीर महाभारत कथा: (1) विराट पर्व (अंक 1-3) (2) उद्‌योग पर्व (अंक 1-3) व्याकरण: -- अपठित गद्‌यांश -- अनुच्छेद लेखन -- पत्र लेखन -- विलोम शब्द -- पर्यायवाची शब्द ...
मैं धूल का कण जिस दिन बिछड़ूँ मैं, इस तन से उड़ जाऊँ, क्या खोएगा विश्व, कोई रत्न गवाऊँ? मेरा होना-न होना, यह बात छोटी-सी, कौन जानेगा कितनी, इस जग की गति-सी? मैं चला जाऊँ, फिर भी दिन-रात गाएगा, चाँद-सूरज का रथ उसी पथ नाच आएगा; फूल हँस-हँस खिलेंगे, पवन गीत सुनाएगी, तारों की टोली अपनी राह पर जाएगी। जैसा आज, वैसा कल, जग का क्रम अटल, न संशय का छींटा, न मन में कोई विह्वल; विश्व के नियम अडिग, न कभी डगमगाते हैं, मेरे बिना भी सदा, वे गीत गुनगुनाते हैं। मेरे न रहने से, न रुकेगा कोई काम, सृष्टि की धारा बहे, न थमे उसका धाम; कर्म में लीन यह विश्व, अनंत, अथाह, सुंदर, मेरे जाने की खबर न पाएगा यह मंदर। धूल की अनंत रज में, मैं कण एक तुच्छ-सा, नन्हा-मुन्ना, हल्का-सा, बस स्वप्न-सा चटक-सा; मेरे बिना भी सृष्टि, रहेगी पूर्ण, रमणीया, न होगी कमी कभी, न टूटेगा यह तमाशा।  

प्रश्नोत्तर (व्याकरण)

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  1: शब्द और पद प्रश्न 1: सार्थक वर्ण समूह को क्या कहा जाता है? उत्तर : शब्द  प्रश्न 2: जब शब्दों को वाक्य में स्थान मिलता है, तो ये क्या कहलाते हैं? उत्तर : पद प्रश्न 3: नाम का बोध कराने वाले शब्द क्या कहलाते हैं? उत्तर : संज्ञा प्रश्न 4: संज्ञा के कितने भेद होते हैं? उनके नाम लिखिए।  उत्तर : संज्ञा के तीन भेद होते हैं। उनके नाम हैं -- (i) जातिवाचक संज्ञा, (ii) व्यक्तिवाचक संज्ञा और (iii) भाववाचक संज्ञा। प्रश्न 5: गौतम बुद्ध, ऐरावत, काठमांडू, हिमालय, बागमति --- आदि किस संज्ञा के उदाहरण हैं? उत्तर : व्यक्तिवाचक संज्ञा प्रश्न 6: शहर, पहाड़, देश, नदी, किताब -- आदि किस संज्ञा के उदाहरण हैं? उत्तर : जातिवाचक संज्ञा  प्रश्न 7: सच्चाई, बचपन, मोटापा, शीतलता, ईमानदारी -- किस संज्ञा के उदाहरण हैं? उत्तर : भाववाचक संज्ञा प्रश्न 8: जो शब्द संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होते हैं, वे कौन से पद होते हैं? उत्तर : सर्वनाम  प्रश्न 9: सर्वनाम के कितने भेद होते हैं? उनके नाम लिखिए।   उत्तर : सर्वनाम के 6 (छह) भेद होते हैं। उनके नाम हैं -- (i) पुरुषवाचक सर्वनाम  (!!) निश्...

साना साना हाथ जोड़ि.../मधु काँकरिया

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   साना साना हाथ जोड़ि...                                        ---मधु काँकरिया  प्रश्न 1: झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था? उत्तर : गंतोक शहर की एक झलक ने ही लेखिका को सम्मोहित कर लिया था। रात्रि के समय जगमगाते प्रकाश के कारण शहर अत्यंत सुंदर नजर आ रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे आकाश के सारे तारे नीचे बिखर कर जमीन पर टिमटिमा रहे हैं। तराई में तारों के गुच्छों की झालर-सी लटकती दिखाई दे रही थी। प्रश्न 2: गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' क्यों कहा गया? उत्तर : गंतोक को सुंदर बनाने में यहाँ के श्रमिक वर्ग के साथ-साथ यहाँ के परिश्रमी निवासी, पुरुष-महिला आदि सभीका काफी योगदान है। उन्हीं के श्रम के बल पर सिक्किम और गंतोक को अद्भुत सुंदरता मिली है। इसलिए लेखिका ने गंतोक को 'मेहनतकश बादशाहों का शहर' कहा है।  प्रश्न 3: कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओं का फहराना किन अलग-अलग अवसरों की ओर संकेत करता है? उत्तर : बौद्ध धर्म के लोगों द्वारा...

आत्मकथ्य/जयशंकर प्रसाद

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    आत्मकथ्य             --जयशंकर प्रसाद प्रश्न 1: कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है? उत्तरः कवि आत्मकथा लिखने से इसलिए बचना चाहता है क्योंकि वह सोचता है कि उसके जीवन में ऐसा कुछ विशेष घटित नहीं हुआ है, जिसे वह आत्मकथा के रूप में प्रस्तुत कर सके अथवा जिसे पढ़कर किसी को प्रेरणा और आनंद मिले। कवि अपने जीवन की दुर्बलता एवं असफलता और दूसरों की प्रवंचनाओं को सबके सामने उजागर करना नहीं चाहता। प्रश्न 2: आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में 'अभी समय भी नहीं' कवि ऐसा क्यों कहता है?  उत्तर : कवि जीवन की पीड़ा, व्यथा और दुख-कष्टों को सहन करते हुए थक चुके हैं। वे उनका वर्णन करने को अनिच्छुक एवं असमर्थ हैं। आत्मकथा लिखते वक्त उन सभी पीड़ाओं को उन्हें फिर जगाना होगा, जो उनके लिए असहनीय है। इसलिए कवि कहना चाहते हैं कि आत्मकथा सुनाने का यह उचित समय नहीं है। प्रश्न 3: स्मृति को 'पाथेय' बनाने से कवि का क्या आशय है?  उत्तरः कवि के निराश जीवन में आज न तो कोई सुख बचा है और न ही कोई आशा। अतीत की मधुर यादें तथा प्रियतमा के संग व्यतीत किए गए क्षणों की मधुर स्म...

कृष्ण लीला

 कृष्ण लीला (1) मथुरा कारागार में श्रीकृष्ण जन्म और गोकुल में स्थानांतरण प्रसंग  (कारागार में दैवीय चमत्कार -- अँधेरा -- कारागार की सलाखें -- बेड़ियों में जकड़े वसुदेव और देवकी -- मूसलधार वर्षा -- बिजली की गड़गड़ाहट -- पृष्ठभूमि में यमुना नदी का प्रवाह ध्वनि -- कंस के सैनिकों की भारी पदचाप ध्वनि) देवकी: (कारागार में शोक भरे स्वर में) हे वसुदेव! कंस ने एक-एक कर हमारे सात पुत्रों को मार डाला। मेरे गर्भ में पल रहे इस आठवें पुत्र का भी क्या वही भाग्य होगा? मेरे हृदय में भारी भय हो रहा है, स्वामी! वसुदेव: (सांत्वना देते हुए) धैर्य रखो, देवकी! आकाशवाणी याद करो। ईश्वर ने हमें आश्वासन दिया है। आठवीं संतान कोई साधारण पुत्र नहीं होगा। वह हमारी ही नहीं संपूर्ण धरती का उद्धारकर्ता होगा। [मंच पर मधुर ध्वनि -- भारी वर्षा की आवाज -- कारागार में सौम्य नीला प्रकाश -- श्रीकृष्ण का चतुर्भुज स्वरूप में जन्म -- शंख, चक्र, गदा, पद्म लिए चतुर्भुज रूप में श्रीकृष्ण का प्रकट होना]  देवकी: हे प्रभु! हम तो आप के शिशु रूप की प्रतीक्षा कर रहे थे। यह कैसा चमत्कार! हम कारागार में लंबे समय से बंदी हैं। ...

स्मृति/-- श्रीराम शर्मा

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  स्मृति   -- श्रीराम शर्मा प्रश्न 1: भाई के बुलाने पर लौटते समय लेखक के मन में किस बात का डर था? उत्तर : भाई के बुलाने पर लेखक घर की ओर जा रहा था, परंतु वह मन ही मन बहुत डर भी रहा था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उससे कौन-सा कसूर हो गया है। उसे आशंका थी कि कहीं बेरी खाने के अपराध में कहीं उसके बड़े भाई से मार न पड़ जाए। प्रश्न 2: मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढेला क्यों फेंकती थी?  उत्तरः कुएँ में एक साँप गिर पड़ा था। जब बच्चे कुएँ में ढेला फेंकते थे तो साँप फुँफकार मारता था। उसकी फुँफकार सुनने में बच्चों को बड़ा मजा आता था। इसलिए मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढेला फेंकती थी।  प्रश्न 3: "साँप ने फुसकार मारी या नहीं, ढेला उसे लगा या नहीं, यह बात अब तक स्मरण नहीं।" -- यह कथन लेखक की किस मनोदशा को स्पष्ट करता है?  उत्तरः यह कथन लेखक की घबराहट और डर की मानसिकता को प्रकट करता है। ढेला फेंकते समय उसकी टोपी में रखी गई चिट्ठियाँ कुएँ में जा गिरी थीं। इसलिए उसका ध्यान साँप को ढेला लगने य...

श्रीमद्भगवद्गीता का प्रथम अध्याय

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श्रीमद्भगवद्गीता का प्रथम अध्याय श्रीमद्भगवद्गीता के प्रथम अध्याय ( अर्जुनविषादयोग ) का प्रथम श्लोक है -- धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय।। नीचे इसका अत्यंत विस्तारपूर्वक विश्लेषण किया गया है। इस श्लोक की शब्द-शब्द व्याख्या, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ, दार्शनिक और आध्यात्मिक अर्थ, साहित्यिक विशेषताओं, और इसके व्यापक महत्व के साथ विस्तार से समझाया गया है। साथ ही इसकी व्याख्या व्यापक, गहन, और संरचित हो, इस पर भी ध्यान दिया गया है, ताकि आपको श्लोक का हर पहलू स्पष्ट हो। श्लोक का  मूल पाठ --  धर्मक्षेत्रे  कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय।। उच्चारण: Dharma-kshetre kuru-kshetre samaveta yuyutsavah, Mamakaah pandavashchaiva kim akurvata sanjaya. शब्द-शब्द विश्लेषणइस श्लोक को समझने के लिए प्रत्येक शब्द का अर्थ और निहितार्थ महत्वपूर्ण है। नीचे प्रत्येक शब्द का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है: धर्मक्षेत्रे (Dharma-kshetre): धर्म: यह संस्कृत शब्द अत्यंत व्यापक अर्थ रखता है। इसका अर्थ है सत्य, नैतिकता, कर...